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सनातन संस्कृति के युवा मार्गदर्शक – डॉ. प्रेमासाई महाराज जी

 भारत की पवित्र धरती ने अनेक संतों और महापुरुषों को जन्म दिया है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए डॉ. प्रेमासाई महाराज जी आज के युग में सनातन धर्म, समाजसेवा और आध्यात्मिक जागरण के सशक्त प्रतीक बन चुके हैं।

 
प्रारंभिक जीवन
 
21 अक्टूबर 1991 को में जन्मे डॉ. प्रेमासाई महाराज जी ने बाल्यावस्था से ही गहन साधना का मार्ग अपनाया। मात्र सात वर्ष की आयु में उन्होंने सांसारिक आकर्षणों से ऊपर उठकर ध्यान, योग और तांत्रिक साधना का अभ्यास प्रारंभ किया। उनकी बाल साधक के रूप में पहचान शीघ्र ही समाज में फैल गई।
 
 
 
अद्वितीय आध्यात्मिक साधना
 
महाराज जी की साधना और उनके द्वारा किए गए अनोखे यज्ञों ने देश-विदेश के भक्तों को आकर्षित किया है।
 
स्वस्तिक महा यज्ञ और सुदर्शन चक्र महा यज्ञ का आयोजन उनके मार्गदर्शन में भव्य पैमाने पर सम्पन्न हुआ।
 
उन्होंने बगलामुखी हवन यज्ञ में 11 टन लाल सूखी मिर्च की आहुति दी, जो विश्व में अद्वितीय माना जाता है। विशेष बात यह रही कि इतने बड़े पैमाने पर लाल मिर्च की आहुति के बावजूद उपस्थित किसी भी व्यक्ति को खांसी या असुविधा का अनुभव नहीं हुआ; सभी ने हल्कापन और प्रसन्नता का अनुभव किया। यह आयोजन अब वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में पंजीकृत किया जा रहा है।
 
 
समाजसेवा और प्रेरक कार्य
 
महाराज जी केवल आध्यात्मिक उपदेश तक सीमित नहीं हैं।
 
हिंदू राष्ट्र संघ जैसी संस्थाओं के माध्यम से वे स्वास्थ्य, शिक्षा, और आजीविका से वंचित वर्गों की सहायता करते हैं।
 
आपदा राहत, सामाजिक एकता और राष्ट्रभक्ति के लिए वे निरंतर मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
 
वे सनातन संस्कृति को सशक्त करने और समाज में नैतिकता, समानता व जिम्मेदारी का भाव जगाने का कार्य कर रहे हैं।
 
 
सम्मान और उपलब्धियाँ
 
आध्यात्मिक और सामाजिक क्षेत्र में योगदान के लिए मानद डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की जा चुकी है। उनके अद्भुत यज्ञ और समाजहित के कार्यों के कारण उनका नाम विश्व स्तर पर चर्चित हो रहा है।
 
 
युवा आयु में ही डॉ. प्रेमासाई महाराज जी ने यह सिद्ध कर दिया है कि दृढ़ संकल्प, साधना और सेवा भाव से समाज को नई दिशा दी जा सकती है। आज वे भारत ही नहीं, बल्कि विश्वभर के श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं। सनातन संस्कृति के संवाहक के रूप में उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों को आध्यात्मिक जागरूकता और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश देता रहेगा